कंपोजिशन करना अपने आप में विवेक और अनुभव पर आधारित होता है। अनुकरण और अनुभव में बहुत अंतर होता है इस अंतर को आमतौर पर छोटे बच्चे नजर अंदाज करते हैं। तभी आप पाते हैं कि उनके मन की परिकल्पना उनके चित्रों में विराजमान होती है उसे आप समझ पाएं या भले ना पाएं। कमोवेश राजनीती में भी यही होता है और समाजवादियों की राजनीती में पूंजीवाद की बू आने लगी है।
यह कंपोजिशन उसी स्वभाव को दर्शाता है।
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मेरे अंदर का दर्द ?
कैसे मापोगे?
मेरे चेहरे से या किसी और से।
यह तो मैं भी नहीं जानता।
अगला पल ?
कहां ले जायेगा ।
किसको पता है।
डॉ वैद्य हकीम कितने अच्छे हैं।
यह कैसे जानोगे।
मध्यकालीन स्वास्थ्य
या आधुनिक आविष्कार ।
का इस्तेमाल करने का हक़ !
किसको किसको है ?
व्यापारी सरकार ।
सौदा कर रही है ?
समाजवादी पूंजीवाद से ।
उसको कैसे नापोगे।
सवाल जटिल है ?
उत्तर किससे मांगोगे ?
राजनीती नहीं घर और परिवार ?
यह कैसा है संवैधानिक अधिकार ?
देश का लोकतंत्र बचाने का।
कैसे मापोगे?
मेरे चेहरे से या किसी और से।
यह तो मैं भी नहीं जानता।
अगला पल ?
कहां ले जायेगा ।
किसको पता है।
डॉ वैद्य हकीम कितने अच्छे हैं।
यह कैसे जानोगे।
मध्यकालीन स्वास्थ्य
या आधुनिक आविष्कार ।
का इस्तेमाल करने का हक़ !
किसको किसको है ?
व्यापारी सरकार ।
सौदा कर रही है ?
समाजवादी पूंजीवाद से ।
उसको कैसे नापोगे।
सवाल जटिल है ?
उत्तर किससे मांगोगे ?
राजनीती नहीं घर और परिवार ?
यह कैसा है संवैधानिक अधिकार ?
देश का लोकतंत्र बचाने का।
- डॉ लाल रत्नाकर

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